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परदा डालने में माहिर प्रबंधन की खुली पोल, 6 दिन बन्द रही 500 मेगावाट की पांचवी यूनिट, सरकार को हुआ अरबों का नुकसान, प्रबंधन ने किया था दावा, पाइप में मामूली लीकेज ।

# प्रदीप पटेल | 13 Jul, 2021

बिलासपुर। कमोबेश सभी औद्योगिक कम्पनियां चालाक होती है। चाहे सार्वजनिक क्षेत्र की हो या फिर निजी क्षेत्र की। प्रबंधन बहुत चालाक होता है । प्रभावितों को चाहे कितना भी नुकसान.हो उनके ठेंगे से। यही कारण है कि प्रबंधन अपनी तानाशाही से बाज नहीं आता है। बात सीपत स्थित सुपर थर्मल पावर ताप विद्युत केन्द्र की है। मजाल है कि किसी को जानकारी हो कि करीब एक सप्ताह तक 500 मेगावाट यूनिट से बिजली का उत्पादन नहीं हुआ..कमाल की बात है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। और प्रबंधन भी सिर्फ इतना बताकर मामला शांत करा दिया कि पाइप फूटा है। तुर्रा यह कि संस्थान को किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं हुआ । एक सप्ताह पहले आम जनता को वेवमीडिया और अखबारों से जानकारी मिली कि सीपत स्थित एनटीपीसी यूनिट की यूनिट पांच का बायलर का  पाइप फूट गया है।

इससे एनटीपीसी को भारी नुकसान हुआ है। खबर में बताया गया कि पाइप के ब्लास्ट होने से पेंट हाउस की छत को भारी नुकसान हुआ है। हादसे से बिजली निर्माण पर भी प्रभाव पड़ा है।  खबर को गलत साबित करने दूसरे दिन एनटीपीसी प्रबंधन सामने आया। प्रबंधन ने बताया कि सात जुलाई को एनटीपीसी यूनिट 5 में सुबह करीब सात बजे बायलर के ऊपर की पाइप में लीकेज हो गया। इसके बाद यूनिट आटोमेटिक सुरक्षा सिस्टम के चलते अपने आप बन्द हो गयी। पाइल लीकेज की घटना में कोई भी व्यक्ति ना तो घायल हुआ है। और ना ही किसी को किसी प्रकार का नुकसान ही हुआ है। यूनिट को मरम्मत किया गया। और दो दिनो में चालू भी हो जाएगी । सूत्रों की माने तो प्रबंधन का बयान आधा हकीकत आधा फसाना है। यूनिट के बायलर की पाइप में लिकेज नहीं..बल्कि बायलरके ऊपर लगी पाइप में ब्लास्ट हुआ था।

ब्लास्ट इतना जबरदस्त था कि पेन्ट का छत ही उड़ गया। किसको चोट पहुंची, और कितना नुकसान हुआ। शानदार प्रबंधन कौशल के चलते इसकी जानकारी बहरहाल किसी को नहीं है । सूत्रों की माने तो पाइप लाइन में भयानक विस्फोट से एनटीपीसी को करोड़ों या अरबों का नुकसान हुआ है। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि एक सप्ताह तक पांच सौ मेगावाट की यूनिट से पांच दिनों तक एक यूनिट भी बिजली का निर्माण नहीं हुआ। यद्यपि प्रबंधन ने दावा किया था कि दो दिन में मरम्मत के बाद यूनिट काम करना शुरू कर देगा। लेकिन सच्चाई तो यह है कि सात जुलाई को यूनिट ने काम करना बन्द किया। इसके बाद 12 जुलाई से बिजली उत्पादन शुरू हुआ। अन्दर से मिली खबर की माने तो करीब 6 दिन यूनिट से कोई काम नहीं हुूआ।

इसके चलते सरकार को प्रति घंटे लगभग पचास करोड़ का नुकसान हुआ है। यह नुकसान करोड़ों करोड़ यानि अरबों रूपयों से अधिक है। वही प्रबंधन ने अभी भी मामले में चुप्पी साधकर रखा। यूनिट शुरू होने के बाद भी कोई बयान देना मुनासिब नहीं समझा है। जानकारी देते चलें कि यूनिट पांच से प्रतिदिन पांच सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। ऐसे में कयास लगाया जा सकता है कि प्रति मिनट या प्रतिदिन राजस्व का कितना नुकसान हुआ होगा। बहरहाल घटना पर परदा डालने में माहिर एनटीपीसी प्रबंधन इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहा है। यद्यपि इस दौरान सीजी वाल ने कई बार जनसम्पर्क अधिकारी से सम्पर्क का प्रयास किया। लेकिन अधिकारी ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा  ।