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वेतन कटने से नाराज पुलिस हुए कर्मी, लिखा पत्र, जताई असहमति, एक आरक्षक ने तो इस्तीफा तक सौंप दिया ।

# प्रदीप पटेल | 28 Apr, 2021

बिलासपुर। कोरोना संक्रमण काल और प्रदेश में वेतन कटौती को लेकर सबसे ज्यादा बवाल पुलिस विभाग से निकल कर पत्र और स्तीफा के रुप में सामने आ रहा है। वेतन कटौती से पुलिसकर्मियों में आक्रोश बना हुआ है। इसका कारण यह है कि वेतन काटना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी वजह से पुलिसकर्मियों नें पत्र लिखना शुरू कर दिया है। यही नही वेतन से कटौती पर असहमति पत्र भी देने लगे है, लेकिन सरकार ने आदेश जारी कर दिया है कि एक दिन का वेतन देना ही होगा। हम आपको बता दे कि धमतरी पुलिस लाइन में पदस्थ एक आरक्षक ने अपनी नौकरी से इस्तीफा देने तक का ऐलान कर दिया है। ये कोई सामान्य इस्तीफा नही है, बल्कि कई गंभीर आरोप पुलिस के आला अफसरों पर आरक्षक की तरफ से लगाए गए हैं। 

आरक्षक क्रमांक 777 उज्ज्वल दीवान ने बताया कि सभी पुलिस कर्मियों को अपना एक दिन का वेतन स्वेच्छा से मुख्यमंत्री सहायता कोष में देने कहा गया था, लेकिन उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया, तो इस वजह से उसका तबादला नक्सल प्रभावित थाना मेचका में कर दिया गया। आम तौर पर आरक्षकों का तबादला समूह में होता है, लेकिन उज्ज्वल के मामले में सिर्फ एक आरक्षक का तबादला हुआ, जब आरक्षक ने अपना इस्तीफा सौंपने की कोशिश की तो अब इस्तीफा नहीं लिया जा रहा है। इन तमाम आरोपों के साथ आरक्षक ने मीडिया के समक्ष अपनी बातें रखी। खैर यह तो एक आरक्षक की बात हो गयी है, लेकिन देखा जाए तो कमोबेश प्रदेश के लगभग हर जिले से यही खबर आ रही है, कि वेतन न काटा जाए, सरगुजा जिले के बसंतपुर थाना प्रभारी ने एसडीओपी को पत्र लिखा है कि वेतन न काटा जाए, इसी तरह कोरबा जिले के पसान थाना के 16 कर्मचारियों ने भी असहमत दर्शाया है, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी समेत अन्य कई जिलों के पुलिस कर्मियों ने भी वेतन नही काटने के लिए निवेदन किया गया है।

हालांकि सरकार ने साफ तौर पर कहा है की वेतन काटा जाएगा और यह अनिवार्य है। लेकिन हकीकत में देखा जाए तो पुलिस विभाग के ज्यादातर कर्मियों के पत्र वेतन नही काटने को लेकर है। ये वो पत्र है जो सरकार के निर्णय के खिलाफ पुलिसकर्मियों का आक्रोश को प्रदर्शित करता है मतलब अंदर ही अंदर चिंगारी सुलग रही है जो कब शोला बनकर उभरे कहा नहीं जा सकता जरूरत है। सरकार को अपने लिए फैसले को थोपने की बजाए उनकी सहमति से निर्णय लेने की। दबी जुबान से पत्र लिखा जा रहा है, और सरकार के खिलाफ मीडिया के माध्यम से अपनी बातें पहुंचाने का काम किया जा रहा है, कि वेतन नही काटा जाए।

फिलहाल वेतन नही काटने को लेकर जहाँ एक तरफ पुलिस विभाग में नाराजगी है, तो वही इस आवाज को बुलंद करने में कुछ लोग नेताओ का सहारा ले रहे है, लेकिन देखना होगा कि जिस तरीके से पत्र सामने आये हुए है उससे तो यही लग रहा है कि वेतन कटने से कोई भी खुश नही है। पुलिस कर्मियों का कहना है की 24 घण्टे ड्यूटी कर रहे है इसके बाद भी वेतन काटा जा रहा है। जबकिं ड्यूटी में किसी तरह की कोई भी कमी नही की जा रही है। फिलहाल संकेत अच्छे नहीं है सरकार को चाहिए कि वेतन कटौती के निर्णय को थोपने की बजाए उनकी सहमति से निर्णय लेने की। ताकि वैश्विक आपदा के दौर में आम जनता सहित पुलिसकर्मियों को भी राहत मिल सके।